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US Based India Focused Think Tank Report That No Evidence Of Religious Violence In Manipur


US Based Think Tank Report: अमेरिका स्थित भारत केंद्रित थिंक टैंक ने रिपोर्ट में कहा है कि मणिपुर में धार्मिक हिंसा के कोई सबूत नहीं हैं और उसने इस हिंसा के लिए अंतर-जनजाति अविश्वास, आर्थिक प्रभावों के डर, मादक पदार्थ और विद्रोह को जिम्मेदार ठहराया है. इस सप्ताह जारी रिपोर्ट में फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने कहा कि कुछ लोगों के आरोपों के अनुसार, विदेशी दखल की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता’.

भारत सरकार ने की शांति स्थापित करने की कोशिश
FIIDS ने कहा कि मणिपुर राज्य सरकार और भारत सरकार दोनों ने शांति स्थापित करने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए अपने सभी संसाधन तैनात किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘संक्षेप में कहें तो अतीत की नकारात्मक बातें, जनजातियों के बीच आपसी अविश्वास, आर्थिक प्रभाव का डर, मादक पदार्थ और विद्रोह इस हिंसा में कारक रहे हैं. महत्वपूर्ण रूप से यह ध्यान देने वाली बात है कि जनजातियों के बीच धार्मिक ध्रुवीकरण मौजूद हैं, लेकिन हमें धार्मिक हिंसा के सबूत नहीं मिले. इसके बजाय यह जातीय विभाजन और जनजातियों के बीच ऐतिहासिक अविश्वास और प्रतिद्वंद्विता पर आधारित है.’’

उग्रवादी/चरमपंथी समूहों ने फायदा उठाया
एजेंसी ने गुरुवार (24 अगस्त) को जारी प्रेस रिलीज में कहा, ‘‘अलग-अलग निष्क्रिय उग्रवादी/चरमपंथी समूहों ने इन हालात का फायदा उठाया और अपनी उपस्थिति पुन: दर्ज कराने के लिए गोलीबारी की. मादक पदार्थ माफियाओं के धन और हथियारों से इसे बढ़ावा मिला. ये माफिया म्यांमार के माध्यम से निर्यात के लिए अफीम उगाते हैं और हेरोइन बनाते हैं. कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी हस्तक्षेप से इनकार नहीं किया जा सकता है.’’

हिंसा और विरोध प्रदर्शन शांत हो गए
हाल के हफ्तों में हिंसा और विरोध प्रदर्शन शांत हो गए हैं, लेकिन जनजातियों के बीच अविश्वास अब भी मौजूद है और विस्थापित लोग अब भी अपने मूल स्थान पर लौटने में सहज नहीं हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि चर्चा, बातचीत, विश्वास-निर्माण संबंधी महत्वपूर्ण उपाय और प्रभावित लोगों के जीवन के पुनर्निर्माण में मदद जैसे कदम इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक हैं. FIIDS ने कहा कि रिपोर्ट को अमेरिका स्थित नीति निर्माताओं और थिंक टैंक के साथ साझा किया जाएगा.

हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत
मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आदिवासी एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 फीसदी है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

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