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Abraham Lincoln Birth Anniversary The President Of America Who Ended Slavery There Know His Life And Struggle


Abraham Lincoln Birth Anniversary: “मैं जानता हूं कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं. यह बात मेरे बेटे को भी सीखनी होगी. पर मैं चाहता हूं कि आप उसे यह बताएं कि हर बुरे आदमी के पास भी अच्छा दिल होता है. हर स्वार्थी नेता के अंदर अच्छा लीडर बनने की काबिलियत होती है. मैं चाहता हूं कि आप उसे सिखाएं कि हर दुश्मन के अंदर एक दोस्त बनने की संभावना भी होती है. ये बातें सीखने में उसे समय लगेगा, मैं जानता हूं. पर आप उसे सिखाइए कि मेहनत से कमाया गया एक रुपया, सड़क पर मिलने वाले पांच रुपये के नोट से ज्यादा कीमती होता है.”

ये लफ्ज़ एक राष्ट्रपति की तरफ से अपने बेटे के टीचर को लिखे गए हैं. ये शख्स कोई और नहीं बल्कि अमेरिका के 16वें  राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन थे. उनको दुनिया में अमेरिका में दास प्रथा को खत्म करने के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके इतर भी उनकी शख्सियत के कई और अंदाज भी हैं.

उनकी जिंदगी का सफरनामा खुद में एक विरासत समेटे हुए है. उनकी बॉयोग्राफी में वो खुद को कुछ ऐसे पेश करते हैं, “मैं जंगल में पला-बढ़ा… बेशक जब मैं बड़ा हुआ तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. फिर भी किसी तरह, मैं पढ़, लिख और इशारों में बात कर सकता था …” इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 12 फरवरी को जन्मे यूएस के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का बचपन आसान नहीं नहीं रहा होगा. 

‘मैं जंगल में पला- बढ़ा’

थॉमस लिंकन और नैन्सी हैंक्स लिंकन की दूसरी संतान के तौर पर हॉजेनविले, केंटकी के पास सिंकिंग स्प्रिंग फार्म के एक लॉग केबिन में अब्राहम लिंकन एक गरीब अश्वेत परिवार पैदा हुए थे. लिंकन केंटुकी फ्रंटियर्समैन यानी सरहद पर रहने वाले सिपाही के बेटे थे. उन्हें जीने और सीखने के लिए बेहद कड़ा संघर्ष करना पड़ा. राष्ट्रपति पद के लिए अपनी पार्टी का नामांकन करने से 5 महीने पहले उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में लिखा.

लिंकन ने अपने इस बायो में लिखा, “मेरा जन्म 12 फरवरी, 1809 को हार्डिन काउंटी, केंटकी में हुआ था. मेरे माता-पिता दोनों वर्जीनिया में पैदा हुए थे, उलझे हुए परिवारों के दूसरे परिवार, शायद मुझे कहना चाहिए. मेरी मां, जो मेरे 10 साल का होने पर मर गई थी, वो हैंक्स नाम के एक परिवार से थी. मेरे पिता को केंटकी से हटाकर मेरे 8वें साल में होने के दौरान  इंडियाना भेजा गया. यह एक जंगली क्षेत्र था, जहां कई भालू और अन्य जंगली जानवर अब भी जंगल में हैं. वहीं मैं पला-बढ़ा. बेशक जब मैं बड़ा हुआ तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. फिर भी किसी तरह, मैं पढ़, लिख और कोड में बात कर सकता था … यही सब कुछ था.”

लिंकन के दादा और हमनाम, कप्तान अब्राहम लिंकन और पत्नी बतशेबा (नी हेरिंग) परिवार को वर्जीनिया से जेफरसन काउंटी, केंटकी ले गए. उनके दादा 1786 में एक नार्थ ईस्ट इंडियन रेड में मारे गए. लिंकन के पिता थॉमस अपने अन्य भाई-बहनों के साथ इस हमले के गवाह बने.

थॉमस ने 1800 के दशक की शुरुआत में हार्डिन काउंटी, केंटकी में बसने से पहले केंटकी और टेनेसी में कई न करने वाली नौकरियां कर परिवार चलाया. लिंकन के पिता थॉमस और नैन्सी ने 12 जून, 1806 को वाशिंगटन काउंटी में शादी की और वहां से एलिज़ाबेथटाउन, केंटकी चले गए. उनके 3 बच्चे सारा, अब्राहम और थॉमस हुए और थॉमस की बचपन में ही मौत हो गई. 

खेतों में किया काम और पढ़ी किताबें

लिंकन की ज्ञान पिपासा इतनी अधिक थी कि वो बचपन से ही इसके लिए बेहद गंभीर रहे. इसके लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. किताबें पढ़ने के लिए उन्होंने फार्म में किया. दीवारों में बाड़ लगाई तो न्यू सलेम, इलिनोइस के स्टोर में काम किया. कहा जाता है कि उनको किताबें पढ़ने का इतना शौक था कि वो रोड में लैंप पोस्ट के नीचे पढ़ते थे.

गरीबी की वजह से लिखने के लिए कागज न होने पर घर की दीवारों पर पत्थर से पढ़ी हुई बातें उकेरते और फिर दोबारा वॉल पर पुताई कर उस पर लिखते.  वह ब्लैक हॉक जंग में कैप्टन रहे थे. इलिनोइस विधायिका में 8 साल बिताए और कई साल तक अदालतों में काम किया. उनके लॉ के दिनों के साथी ने उनके बारे में कहा, “उनकी महत्वाकांक्षा एक छोटा सा इंजन था जो कभी आराम करना नहीं जानता था.” 

इश्क नहीं हुआ मुकम्मल

लिंकन का पहला प्यार एन रटलेज थीं. उनसे वो न्यू सलेम चले गए. वो 1835 तक वे एक रिश्ते में थे लेकिन औपचारिक तौर पर सगाई नहीं की थी, लेकिन लिंकन का इश्क परवान नहीं चढ़ पाया 1835 में रटलेज की टाइफाइड से मौत हो गई. 1830 के दशक की शुरुआत में उनकी मुलाकात केंटकी की मैरी ओवेन्स से हुई, लेकिन विचार न मिलने की वजह से वो अलग हो गए. 

16 अगस्त, 1837 को लिंकन ने ओवेन्स को एक खत लिखा था. उन्होंने लिखा, “अगर उन्होंने रिश्ता तोड़ दिया तो वह उन्हें दोष नहीं देंगे.” और ओवेन्स कभी इस खत का जवाब नहीं दिया.” 1839 में लिंकन की मुलाकात स्प्रिंगफील्ड, इलिनोइस में मैरी टॉड से हुई और अगले साल उन्होंने सगाई कर ली. मैरी  लेक्सिंगटन, केंटकी में एक दौलतमंद वकील और कारोबारी रॉबर्ट स्मिथ टॉड की बेटी थीं.  लिंकन और मैरी टॉड के चार बेटे हुए. उनमें से केवल एक थॉमस टेड लिंकन ही जीवित बचे थे.

संघर्ष का दूसरा नाम लिंकन

अब्राहम लिंकन की जिंदगी को संघर्ष नाम दिया जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. 31 वें साल में वो कारोबार में नाकामयाब हुए. 32 वें साल में उन्हें स्टेट लेजिस्लेटर के चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा. 33 वें साल में उन्होंने नए कारोबार के लिए कोशिश की, लेकिन फिर नाकाम हुए. 35 वें साल में मंगेतर की मौत हुई.

36 वें साल में नर्वस ब्रेक डाउन के शिकार हुए. 43 वें साल में कांग्रेस के लिए चुनाव लड़े फिर नाकामी हाथ लगी. 48 वें साल में दोबारा से कोशिश की, लेकिन फिर से हार का स्वाद चखना पड़ा. 55 वें साल में लिंकन ने सीनेट के चुनावों में हार हुई. 1858 में लिंकन सीनेटर के लिए स्टीफन ए डगलस के खिलाफ लड़े. वह चुनाव हार गए, लेकिन डगलस के साथ बहस में वो पूरे देश में मशहूर हो गए.

इसी वजह से उन्होंने 1860 में राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन नामांकन जीता.इसके अगले साल वाइस प्रेजिडेंट के चुनावों में भी नाकामी मिली. 59 वें साल में फिर से सीनेट के चुनाव लड़े, लेकिन हार ने पीछा नहीं छोड़ा. वो लड़ते रहे और आखिर में 1860 में वो पहले रिपब्लिकन थे जो अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति बने. राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी को एक मजबूत राष्ट्रीय संगठन बनाया. 

लिंकन ने अपने उद्घाटन भाषण में दक्षिण  राज्यों को चेतावनी दी: “आपके हाथों में, मेरे असंतुष्ट साथी देशवासियों, न कि मेरे हाथों में, गृहयुद्ध का महत्वपूर्ण मुद्दा है. सरकार आप पर हमला नहीं करेगी… आपके पास सरकार को खत्म करने के लिए स्वर्ग में कोई शपथ नहीं है, जबकि मेरे पास इसे संरक्षित करने, रक्षा और बचाव करने के लिए सबसे गंभीर शपथ होगी.”

दास प्रथा से थी नफरत

लिंकन को शुरू से ही गुलामों पर हो रहे जुल्मों से सख्त नफरत थी और वो दास प्रथा को खत्म करना चाहते थे. अमेरिका में गुलामी की प्रथा का बोलबाला था. दक्षिणी राज्यों के बड़े खेतों के मालिक गोरे लोग थे और वह अफ्रीका से काले लोगों को अपने खेत में काम करने के लिए दास बनाते थे. वहीं उत्तरी राज्यों के लोग गुलामी की इस प्रथा के खिलाफ थे. समानता पर आधारित अमेरिकी संविधान में गुलामी के लिए जगह नहीं थी.

1860 के इस मुश्किल वक्त में अब्राहम लिंकन संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे. वो गुलामी की समस्या सुलझाना चाहते थे. दक्षिणी राज्यों के लोग गुलामी के खात्मे के खिलाफ थे. वहां दक्षिणी राज्य एक नए देश बनाने की तैयारी कर रहा था. लिंकन चाहते थे कि सभी राज्य एक रहें. वो हर कीमत पर देश की एकता की रक्षा करना चाहते थे. वहां उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच एक गृह युद्ध छिड़ गया.

उन्होंने इस युद्ध का बहादुरी से मुकाबला किया. लिंकन ने एलान किया, “एक राष्ट्र आधा आजाद और आधा दास नहीं रह सकता.” वो ये जंग जीत गए और उनका देश एकजुट रहा. 1 जनवरी, 1863 राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने मुक्ति की उद्घोषणा जारी की, जिसने गुलामों को हमेशा के लिए आजाद करने का एलान किया था. गुलामी के खात्मे के प्रतीक के तौर पर यहां 19 जून, 1866 से जूनटींथ त्योहार मनाया जाता है. ये नाम जून और नाइनटींथ (19) को जोड़कर बना है. इसे यहां स्वतंत्रता दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है.

इसने सभी दासों को औपचारिक तौर से 2 साल पहले ही आजाद कर दिया था, हांलाकि इसे हकीकत बनने में वक्त लग गया था. टेक्सास दासों को रखने वाले राज्यों का एक समूह था और गृह युद्ध में अमरीकी सरकार के ख़िलाफ़ खड़ा था. इसने सबसे आखिर में अमेरिकी सेना के सामने सरेंडर किया था और ये अमेरिकियों को गुलामी से आजाद करने वाला आखिरी राज्य बना था. 

लिंकन ने दुनिया को कभी यह नहीं भूलने दिया कि गृहयुद्ध में एक और भी बड़ा मुद्दा शामिल था. उन्होंने गेटीसबर्ग में सेना को सैन्य कब्रिस्तान को समर्पित करते हुए बेहद भावपूर्ण तरीके से कहा, “कि हम यहां संकल्प करते हैं कि इस देश में हुई ये मौतें बेकार नहीं जाएंगी. इस राष्ट्र में ईश्वर के अधीन स्वतंत्रता का एक नया जन्म होगा – और यह लोगों की, लोगों के लिए और उन्हीं की बनाई सरकार होगी, ये धरती पर कभी खत्म नहीं होगी.”

जब सो गया अमेरिका का लिंकन सदा के लिए

तुम जो भी हो, नेक बनो कहने वाले अब्राहम लिंकन को 4 मार्च 1864 को दोबारा से अमेरिका का राष्ट्रपति चुना गया. इसके ठीक एक महीने बाद 14 अप्रैल को गृह युद्ध के खत्म होने पर गुड फ्राइडे को एक समारोह रखा गया था. फ़ोर्ड थिएटर में हुए इस समारोह में एक्टर जॉन विल्कीस बूथ ने उन्हें गोली मार दी थी और 56 वें साल में ही लिंकन ने दुनिया को अलविदा कह दिया. 

जॉन को लगता था कि वो दक्षिण की मदद कर रहे हैं. इसका नतीजा उल्टा हुआ लिंकन की मौत के साथ उदारता के साथ अमन की संभावना भी खत्म हो गई थी. उनकी मौत के बाद उनकी महानता का सबने पूरी दुनिया में महसूस की गई. अब्राहम लिंकन की विरासत की अहमियत अमेरिकाके लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भी उन्हें उतनी ही इज्जत के साथ याद करती है. 

ये भी पढ़ें: अब्राहम लिंकन के बाल के गुच्छे 81 हजार डॉलर में हुए नीलाम, टेलीग्राम के लिए भी जमकर लगी बोली

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