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2 मिनट की बैठक, हीरानंदानी आए नहीं…, महुआ मोइत्रा के एक्शन पर क्यों उठ रहे हैं ये 3 सवाल?



<p style="text-align: justify;">कैश फॉर क्वैरी यानी पैसे के बदले सवाल पूछने के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को संसद की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है. एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट के बाद ध्वनि मत से लोकसभा ने यह फैसला किया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एथिक्स कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में महुआ को निष्कासित करने की सिफारिश की थी. कमेटी का कहना था कि महुआ ने पैसे के लिए संसद की गरिमा को खतरे में डाला, इसलिए उन पर कठोर कार्रवाई हो.</p>
<p style="text-align: justify;">500 पन्नों की इस रिपोर्ट में एथिक्स कमेटी ने दर्शन हीरानंदानी के एफिडेविट को सच माना है. हालांकि, रिपोर्ट पर विपक्ष ने सवाल उठाया है और इसे नैचुरल जस्टिस के खिलाफ बताया है. एथिक्स कमेटी के सदस्य गिरिधारी यादव ने कहा है कि महुआ मामले में नियमों की अनदेखी की गई और उनकी सदस्यता जानबूझकर ले ली गई.</p>
<p style="text-align: justify;"><em><strong>महुआ मोइत्रा पर कार्रवाई को विपक्ष क्यों कह रहा है गलत, आइए इसे विस्तार से जानते हैं…</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एथिक्स कमेटी की मीटिंग में क्या हुआ था?</strong><br />2 नवंबर 2023 को कैश फॉर क्वैरी मामले में एथिक्स केमटी की पहली बैठक हुई थी. &nbsp;कमेटी के सदस्य और जेडीयू सांसद<strong> गिरिधारी यादव</strong> एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहते हैं- पहले दिन मीटिंग करीब 2 मिनट तक चली. जैसे ही महुआ आई, वैसे ही उनसे कुछ पर्सनल सवाल पूछे गए और विवाद के बाद महुआ बाहर आ गईं.</p>
<p style="text-align: justify;">सांसद गिरिधारी यादव के मुताबिक महुआ से पूछे गए सवाल पर एथिक्स कमेटी के सदस्य और बीएसपी सांसद दानिश अली ने भी ऐतराज जताया. कमेटी का विरोध करते हुए अली भी बैठक से बाहर आ गए.</p>
<p style="text-align: justify;">बाहर आकर महुआ ने पत्रकारों से कहा था कि चेयरमैन ने मुझसे निजी और गंदे सवाल पूछे.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">पहले दिन की मीटिंग में महुआ से क्या सवाल पूछा गया था? इसके जवाब में बीजेपी के सांसद और एथिक्स कमेटी के सदस्य <strong>सुमेधानंद सरस्वती</strong> कहते हैं- यह मामला भी निजी ईमेल अकाउंट से जुड़ा था, तो सवाल भी उसी संदर्भ में पूछा जाएगा न?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सुमेधानंद के मुताबिक महुआ मोइत्रा से एक-दो सवाल ही पूछा गया था और वे अपशब्द बोलकर निकल गईं. हालांकि सवाल क्या था? यह पूछे जाने पर सुमेधानंद एबीपी से कहते हैं- यही कि आप किसके खर्च पर विदेश गईं थी आदि आदि…</p>
<p style="text-align: justify;">कमेटी में शामिल एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महुआ से पहला सवाल यह पूछा गया था कि आप रात को किससे बात करती हैं? इस पर महुआ तमतमा गईं और मीटिंग छोड़कर बाहर चली गईं.</p>
<p style="text-align: justify;">महुआ को इसके बाद एथिक्स कमेटी ने नहीं बुलाया. क्यों नहीं बुलाया गया, इसके बारे में एथिक्स कमेटी के चेयरमैन ने कोई बयान नहीं दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद दूसरी बैठक में फैक्ट फाइंडिंग टीम की मीटिंग हुई, जिसमें रिपोर्ट पर वोटिंग कराया गया. वोटिंग के वक्त कुल 10 सदस्य मौजूद थे, जिसमें से 6 सदस्यों ने रिपोर्ट के पक्ष में और 4 सदस्यों ने विपक्ष में वोट किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महुआ पर एक्शन और 3 सवाल?</strong><br />महुआ मोइत्रा पर हुई कार्रवाई का विपक्षी पार्टियों ने विरोध जताया है. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह नैचुरल जस्टिस के खिलाफ है. महुआ को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;">स्पीकर ओम बिरला ने इसके जवाब में कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता है. सदन में प्रस्ताव पर सिर्फ चर्चा होगी. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने मांग करते हुए कहा कि महुआ को पक्ष रखने का मौका दिया जाए, जिसे स्पीकर ने ठुकरा दिया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महुआ मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट पर 3 सवाल उठ रहे हैं-&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>1.</strong> तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि महुआ मामले में जो कार्रवाई की गई है, वो गलत है. संसद ने महुआ को पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया. महुआ के लिए जो कमेटी गठित की गई थी, उसमें अधिकांश बीजेपी के सांसद थे. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी कहा महुआ को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया. यह रिपोर्ट आधी-अधूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>2.</strong> जेडीयू सांसद और एथिक्स कमेटी के सदस्य गिरिधारी यादव के मुताबिक एथिक्स कमेटी में दर्शन हीरानंदानी को क्रॉस एग्जामिन के लिए नहीं बुलाया गया. कोई कमेटी किसी के एफिडेविट पर कैसे विश्वास कर सकती है? यादव ने स्पीकर से कहा कि कमेटी के चेयरमैन ने हीरानंदानी को बुलाने का वादा किया था.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>3.</strong> गिरिधारी यादव एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहते हैं- महुआ पर पूरा आरोप उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी के एफिडेविट के आधार पर लगाया गया था. बैठक में एफिडेविट के क्रॉस चेक के लिए किसी भी कारगर मैकेनिज्म का उपयोग नहीं किया गया. कैसे माना जाएगा कि एफिडेविट सच है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जल्दबादी में कार्रवाई, वजह- गौतम अडानी?</strong><br />लोकसभा से निष्कासित होने के बाद महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से कहा कि मैं गौतम अडानी का मुद्दा उठा रहा था, इसलिए यह सब हुआ. महुआ ने कहा कि जब नाश मनुज पर छाता है, तो पहले विवेक मर जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">महुआ मामले में तेजी से हुई कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है. अनुशासनहीनता और विशेषाधिकार हनन से जुड़े कई मामले संसद समितियों के पास लंबे वक्त से पेंडिंग है. इनमें बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी, तृणमूल सांसद शिशिर अधिकारी का मामला भी शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">महुआ मामले में इतनी तेजी से एक्शन क्यों लिया गया है? इस सवाल के जवाब में जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव कहते हैं- यह विशुद्ध रूप से एक उद्योगपति से जुड़ा हुआ है. नाम आप भी जानते हैं और देश की जनता भी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एबीपी न्यूज़ ने पूरे मामले में एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद सोनकर बात करनी चाही, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महुआ मोइत्रा पर एक्शन क्यों लिया गया है?</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के वकील और महुआ के करीबी दोस्त रहे जय अनंत देहद्राई ने 14 अक्टूबर को सीबीआई के पास एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. देहद्राई ने अपनी शिकायत में आरोप लगाते हुए कहा कि महुआ संसद में पैसे लेकर सवाल पूछती हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">देहद्राई का कहना था कि दर्शन से पैसा लेकर महुआ अडानी से संबंधित सवाल पूछती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">देहद्राई की शिकायत के बाद उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी का एक एफिडेविट सामने आया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि महुआ ने संसद में सवाल पूछने के लिए उनसे पैसे लिए. क्या और कितने पैसे लिए, इसके बारे में दर्शन ने कुछ नहीं बताया.</p>
<p style="text-align: justify;">महुआ ने पूरे मामले में कहा कि दर्शन से दोस्त के नाते कुछ गिफ्ट लिए थे, वो भी जन्मदिन के मौके पर.</p>
<p style="text-align: justify;">मामला तूल तब पकड़ा, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभ स्पीकर के पास एक पत्र लिखकर महुआ मामले को एथिक्स कमेटी के पास भेजने का आग्रह किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ का संसद आईडी दुबई से एक्सेस किया गया. महुआ ने पूरे मामले प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका का भी जिक्र किया. महुआ का कहना था कि प्रधानमंत्री कार्यालय के दबाव में आकर हीरानंदानी ने यह एफिडेविट जारी किया है.</p>
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